Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: January 26, 2008
भारत के पश्चिमी भाग मे जैन साधुओ ने अपने मत का प्रचार हिन्दी कविता के माध्यम से किया । इन्होंने “रास” को एक प्रभाव्शाली रचनाशैली का रूप दिया । जैन तीर्थंकरो के जीवन चरित तथा वैष्णव अवतारों की कथायें जैन-आदर्शो के आवरण मे ‘रास‘ नाम से पद्यबद्ध की गयी । अतः जैन साहित्य का सबसे [...]
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