हिन्दी साहित्य

Archive for September 2nd, 2008

मालवी बोली

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

भारत के पश्चिम मध्यप्रदेश में विन्ध्य की तलहटी में जो पठार है उसे कम से कम दो हज़ार वर्षों से मालव (मालवा) कहा जा रहा है।

यहॉं के लोग भाषा और पोषाक से कहीं भी पहचान में आते रहे। मौसम की यहॉं सदा कृपा रही है।

इसीलिए सदा सुकाल के सुरक्षित क्षेत्र के रूप में इसकी सर्वत्र [...]

अवधी

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

अवधी भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है, जो असल में हिन्दी की एक बोली है । तुलसीदास कृत रामचरितमानस एवं मलिक मुहम्मद जायसी कृत पद्मावत सहित कई प्रमुख ग्रंथ इसी बोली की देन है। इसका केन्द्र फैजाबाद (उ0प्र0) है।फैजाबाद – लखनऊ से 120 कि0मी0 की दूरी पर पूरब [...]

ब्रजभाषा शैली खंड

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

भाषागत संबंध दो प्रकार के हो सकते हैं : क्षेत्रीय या भौगोलिक संबंध तथा ऐतिहासिक संबंध। प्रथम कोटि के संबंधों की पीठिका में ऐतिहासिक संबंध भी प्रायः रहते हैं। पर, इस स्थिति में क्षेत्रीय संबंधों को, वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमुख स्थान मिलना चाहिए।

 

१.क्षेत्रीय भाषा संबंध पर आधारित

 

इस शैली खंड में वह भू- भाग आता है, [...]

लोक भाषा : ब्रजभाषा

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

भक्ति आंदोलन एक देशव्यापी आंदोलन था। शैली की दृष्टि से लोक भाषा- शैली का उन्नयन इस आंदोलन की सबसे बड़ी देन है। शास्रीय शैली का नियमन और अनुशासन शिथिल हो जाता है। वस्तुगत उदात्तता प्रमुख हो जाती है। आरंभ में निर्गुण विषय- वस्तु गृहीत होती है। परिणामतः विषय- वस्तु से संबद्ध भौगोलिक स्थानीयता का उत्कर्ष [...]

ब्रज का अर्थ

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

ब्रज शब्द संस्कृत धातु ब्रज से बना है, जिसका अर्थ गतिशीलता से है। जहां गाय चरती हैं और विचरण करती हैं वह स्थान भी ब्रज कहा गया है। अमरकोश के लेखक ने ब्रज के तीन अर्थ प्रस्तुत किये हैं- गोष्ठ (गायों का बाड़ा) मार्ग और वृंद (झुण्ड) १ संस्कृत के वृज शब्द से ही हिन्दी [...]

ब्रज भाषा का क्षेत्र

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

भाषा और शैली की दृष्टि से शौरसेनी या पश्चिमी अपभ्रंश का एक व्यापक क्षेत्र था। ब्रजभाषा को एक प्रकार से इसी व्यापक क्षेत्र की सीमाएँ विरासत में मिली थीं। ब्रजभाषा का शैली- रुप भाषा- क्षेत्र से कहीं अधिक विस्तृत सीमाओं का स्पर्श करता है। कुछ लेखकों ने ब्रजभाषा नाम से उसके क्षेत्र- विस्तार का कथन [...]

देवनागरी लिपि का संक्षिप्त परिचय

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

देवनागरी एक लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कुछ विदेशी भाषाएं लिखीं जाती हैं। संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, नेपाली, तामाङ भाषा, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, मैथिली, संथाली आदि भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी और उर्दू भाषाएं भी देवनागरी में [...]

हिन्दी मे वर्तनी

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

किसी शब्द को किस प्रकार वर्णों से अभिव्यक्त किया जाए, यह समस्या काफी समय तक हिंदी में नहीं समझी जाती थी; जबकि अंग्रेजी व उर्दू में इसका महत्त्व था। अंग्रेजी व उर्दू में अर्धशताब्दी पहले भी स्पेलिंग/हिज्जों की रटाई की जाती थी और आज भी। हिंदी भाषा का पहला और बड़ा गुण ध्वन्यात्मकता है। हिंदी [...]

मानक भाषा

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

मानक भाषा और उसके प्रकार

‘मानक’शब्द अपने वर्तमान अर्थ में संस्कृत में नहीं आया है। हाँ, उसमें शब्द लगभग इस अर्थ में अवश्य है। ‘मान’ का संस्कृत में अर्थ ‘माप’, ‘मापदण्ड’, ‘मानदण्ड’ या पैमाना आदि है। ‘मान’ में स्वार्थे प्रत्यय ‘क’ के योग से अंग्रेजी ‘स्टैंडर्ड’ के प्रतिशब्द के रुप में ‘मानक’ शब्द बनाया गया है, [...]

हिन्दी का भाषा वैभव तथा महत्व

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 2, 2008

भाषा की क्षमता के क्या निकष (कसौटियां) होने चाहिये?

(१) भाषा सीखने की सरलता और अक्षरों का वैज्ञानिक वर्गीकरण

(२) सीखने, सिखाने की असंदिग्ध सुस्पष्ट विधि

(३) अक्षर और शब्द उच्चरण की स्पष्टता और सनातनता

यह तीन गुण हिन्दी को देवनागरी लिपि के कारण परम्परा से प्राप्त हैं।

इसके अतिरिक्त, नीचे लिखे हुए गुण, हिन्दी को, वह संस्कृतजन्य होने के [...]


प्रत्याख्यान

यह एक अव्यवसायिक वेबपत्र है जिसका उद्देश्य केवल सिविल सेवा तथा राज्य लोकसेवा की परीक्षाओं मे हिन्दी साहित्य का विकल्प लेने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है। यदि इस वेबपत्र में प्रकाशित किसी भी सामग्री से आपत्ति हो तो इस ई-मेल पते पर सम्पर्क करें-

mitwa1980@gmail.com

आपत्तिजनक सामग्री को वेबपत्र से हटा दिया जायेगा। इस वेबपत्र की किसी भी सामग्री का प्रयोग केवल अव्यवसायिक रूप से किया जा सकता है।

संपादक- मिथिलेश वामनकर

वेबपत्र को देख चुके है

  • 66,669 लोग

c

कैलेण्डर

September 2008
S M T W T F S
« Aug   Oct »
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  

वेब पत्र का उद्देश्य-

मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ, बिहार, झारखण्ड तथा उत्तरांचल की पी.एस.सी परीक्षा तथा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के हिन्दी सहित्य के परीक्षार्थियो के लिये सहायक सामग्री उपलब्ध कराना।

यह वेब पत्र सिविल सेवा परीक्षा मे हिन्दी साहित्य विषय लेने वाले परीक्षार्थियो की सहायता का एक प्रयास है। इस वेब पत्र का उद्देश्य किसी भी प्रकार का व्यवसायिक लाभ कमाना नही है। इसमे विभिन्न लेखो का संकलन किया गया है। आप हिन्दी साहित्य से संबंधित उपयोगी सामगी या आलेख यूनिकोड लिपि या कॄतिदेव लिपि में भेज सकते है। हमारा पता है-

mitwa1980@gmail.com

- संपादक

भारत के सर्वश्रेष्ट ब्लॊग