हिन्दी साहित्य

Archive for the ‘आधुनिक काल के कवि’ Category

दिनकर

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: July 24, 2008

रामधारी सिंह दिनकर (१९०८-१९७४)

 

रामधारी सिंह दिनकर स्वतंत्रता पूर्व के विद्रोही कवि  के रूप में स्थापित हुए और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से जाने जाते रहे। वे छायावादोत्तर कवियों  की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रांति की पुकार है, तो दूसरी ओर कोमल श्रृँगारिक भावनाओं [...]

बाबा नागार्जुन

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: January 17, 2008

बाबा नागार्जुन  

बाबा नागार्जुन को भावबोध और कविता के मिज़ाज के स्तर पर सबसे अधिक निराला और कबीर के साथ जोड़कर देखा गया है. वैसे, यदि जरा और व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो नागार्जुन के काव्य में अब तक की पूरी भारतीय काव्य-परंपरा ही जीवंत रूप में उपस्थित देखी जा सकती है. उनका कवि-व्यक्तित्व [...]

प्रकृति के सुकुमार कवि: सुमित्रानंदन पंत

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: January 17, 2008

 

आज भले ही हिन्दी साहित्य में छायावादी युग का अवसान हो चुका हो किन्तु यह सत्य है कि हिन्दी कविता छायावाद के एक अत्यन्त समृद्ध व सम्पन्न दौर से गुजरा है। हिन्दी में जब कभी छायावाद की चर्चा होती है, तब उसके चार सुदृढ स्तम्भों के रूप में प्रसाद, निराला, महादेवी वर्मा तथा सुमित्रानंदन पंत [...]

निराला का भाषागत संघर्ष

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: January 17, 2008

 

तुलसीदास के बाद हिन्दी साहित्य में निराला ही एक ऐसे कवि हैं जिन्होंने भारतीय काव्य मनीषा को ठीक से समझकर उसे युग अनुरूप प्रेरणादायी बनाया था। जैसे तुलसी ने फारसी के आतंक से हिन्दी को मुक्त कर भाषा के स्तर पर इतने प्रयोग किए कि वह हिन्दी साहित्य के लिए उपयोगी बन गयी। उन्होंने संस्कृत [...]

भारतेंदु हरिश्चंद्र

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: January 16, 2008

 

भारतेन्दु (1850-1882) आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं। वे बनारस के सुंघनी साहू परिवार में जन्मे थे जो तंबाकू के प्रसिद्ध व्यापारी थे। भारतेन्दु बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। हिंदी पत्रकारिता, नाटक और काव्य के क्षेत्र में उनका बहुमूल्य योगदान रहा। उन्होंने ‘हरिश्चंद्र पत्रिका’, ‘कविवचन सुधा’ और ‘बाल विबोधिनी’ पत्रिकाओं का संपादन भी [...]

धर्मवीर भारती

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: November 30, 2007

 

धर्मवीर भारती (२५ दिसंबर, १९२६- ४ सितंबर, १९९७) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक और सामाजिक विचारक थे।

जीवन परिचय

जन्म प्रयाग में हुआ और शिक्षा प्रयाग विश्वविद्यालय में; प्रथम श्रेणी में एम ए करने के बाद डॉ धीरेन्द्र वर्मा के निर्देशन में सिद्ध साहित्य पर शोध प्रबंध लिखकर पी एच डी की डिग्री प्राप्त की।

कार्यक्षेत्र : अध्यापन। [...]

अज्ञेय

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: November 29, 2007

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय“ (१९११-१९८७) का जन्म ७ मार्च १९११ को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कुशीनगर नामक ऐतिहासिक स्थान में हुआ था।

शिक्षा

प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा पिता की देख रेख में घर पर ही संस्कृत, फारसी, अंग्रेजी, और बांग्ला भाषा व साहित्य के अध्ययन के साथ। १९२५ में पंजाब से एंट्रेंस की परीक्षा [...]

सुमित्रानंदन पंत

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: November 28, 2007

अल्मोड़ा निवासी सुमित्रानंदन पंत छायावादी युग के प्रवर्तक के रूप में हिन्दी साहित्य में अभिहित हुये। इस युग को जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और रामकुमार वर्मा जैसे छायावादी प्रकृति उपासक-सौन्दर्य पूजक कवियों का युग कहा जाता है। सुमित्रानंदन पंत का प्रकृति चित्रण इन सबमें श्रेष्ठ था। उनका जन्म ही बर्फ़ से आच्छादित [...]

महादेवी वर्मा

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: November 28, 2007

 
महादेवी वर्मा (26 मार्च, 1907 – 11 सितंबर, 1987) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं।आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। कवि [...]

जयशंकर प्रसाद

Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: November 28, 2007

महाकवि जयशंकर प्रसाद (१८८९-१९३७) हिंदी नाट्य जगत और कथा साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। तितली, कंकाल और इरावती जैसे उपन्यास और आकाशदीप, मधुआ और पुरस्कार जैसी कहानियाँ उनके गद्य लेखन की अपूर्व ऊँचाइयाँ हैं।

जन्म: ३० जनवरी १८९० को वाराणसी में। स्कूली शिक्षा आठवीं तक किंतु घर पर संस्कृत, अंग्रेज़ी, पाली, प्राकृत भाषाओं का [...]


प्रत्याख्यान

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संपादक- मिथिलेश वामनकर

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