Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: August 13, 2008
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी भारतीय मनीषा के प्रतीक और साहित्य एवं संस्कृति के अप्रतिम व्याख्याकार माने जाते हैं और उनकी मूल निष्ठा भारत की पुरानी संस्कृति में हैं लेकिन उनकी रचनाओं में आधुनिकता के साथ भी आश्चर्यजनक सामंजस्य पाया जाता है। “हिन्दी साहित्य की भूमिका” और “बाणभट्ट की आत्मकथा” जैसी यशस्वी कृतियों के प्रणेता आचार्य द्विवेदी [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: August 13, 2008
कविता क्या है ?
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- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
कविता से मनुष्य-भाव की रक्षा होती है. सृष्टि के पदार्थ या व्यापार-विशेष को कविता इस तरह व्यक्त करती है मानो वे पदार्थ या व्यापार-विशेष नेत्रों के सामने नाचने लगते हैं. वे मूर्तिमान दिखाई देने लगते हैं. उनकी उत्तमता या अनुत्तमता का विवेचन करने में बुद्धि से काम लेने की [...]
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