Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: January 17, 2008
भाषा गणना के जार्ज ग्रियर्सन
भारत में पिछली जनगणना २००१ ई. में हुई थी। यह प्रत्येक दशक के प्रारम्भ में होती रही है। विश्व में मानवों की संख्या का सही आकलन करने की इस विश्वजनीन योजना के हम सभी चिर-ऋणी हैं। समस्त संसार की ऐसी जनांकिकी से ही हमें वह अमूल्य सांख्यिकी प्राप्त होती है जो [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: January 17, 2008
भाषा वैज्ञानिक हमें शब्द देते हैं, लेकिन साहित्यकार उन शब्दों को चुनकर एक रचना को जन्म देते हैं। भाषा वैज्ञानिक वाक्य संरचना का ज्ञान कराते हैं, लेकिन साहित्यकार वाक्य का अर्थ सुरक्षित रखते हुए रचना में लालित्य पैदा करते हैं।
भाषा वैज्ञानिक लेखन में भाषा अनुशासन का पाठ पढाते हैं लेकिन साहित्यकार किसी भी भाषायी अनुशासन [...]
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