Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: November 26, 2007
रसखान के जन्म के संबंध में विद्वानों में मतभेद पाया जाता है। अनेक विद्वानों ने इनका जन्म संवत् १६१५ ई. माना है और कुछ विद्वानों ने १६३० ई. माना है। रसखान स्वयं बताते हैं कि गदर के कारण दिल्ली श्मशान बन चुकी थी, तब उसे छोड़कर वे ब्रज चले गये। ऐतिहासिक साक्ष्य के आधार पर पता [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: October 29, 2007
अमीर खुसरो जन्म: 1253 निधन: 1325
कुछ प्रमुख कृतियाँ- ‘तुहफ़ा-तुस-सिगर’, ‘बाक़िया नाक़िया’, ‘तुग़लकनामा’, ‘नुह-सिफ़िर’ ‘मुकरिया’
जे हाले मिसकी मकुल तगाफुल दुराये नैना बनाय बतियां ॥
कि ताबे गिजां न दारम, ऐजां न लेहू काहे लगाए छतियां ॥
शबाने हिजां दाज यूं व रोजे वसतल चू इम्र कोतह ।
सखी, पिया तो जो मैं न देखूं तो कैसे काटूं अन्धेरी रतियां [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: October 29, 2007
विद्यापति भारतीय साहित्य की भक्ति परंपरा के प्रमुख स्तंभों मे से एक और मैथिली के सर्वोपरि कवि के रूप में जाने जाते हैं। इनके काव्यों में मध्यकालीन मैथिली भाषा के स्वरुप का दर्शन किया जा सकता है। इन्हें वैष्णव और शैव भक्ति के सेतु के रुप में भी स्वीकार किया गया है। मिथिला के लोगों [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: October 29, 2007
जन्म – संवत 1205 तदनुसार 1148 ईस्वी में।
मृत्यु – संवत 1249 तदनुसार 1191 ईस्वी में।
रचनाएँ -” पृथ्वीराज रासो ” – दो भागों में नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित।
चंदबरदाई को हिंदी का पहला कवि और उनकी रचना पृथ्वीराज रासो को हिंदी की पहली रचना होने का सम्मान प्राप्त है। पृथ्वीराज रासो हिंदी का सबसे बड़ा [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: October 29, 2007
आदिकाल सन 1000 से 1325 तक हिंदी साहित्य के इस युग को आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने वीर-गाथा काल नाम दिया है। इसका चारण-काल, सिद्ध-सामंत काल और अन्य नाम से भी उल्लेख किया जाता है। इस समय का साहित्य मुख्यतः चार रूपों में मिलता है :
सिध्द-साहित्य,
नाथ-साहित्य,
जैन साहित्य,
चारणी-साहित्य,
प्रकीर्णक साहित्य।
सिद्ध और नाथ साहित्य
यह साहित्य उस समय लिखा गया जब [...]
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