Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 23, 2008
भारतीय धर्म और संस्कृति के इतिहास में कृष्ण सदैव एक अद्भुत व विलक्षण व्यक्तित्व माने जाते रहें है| हमारी प्राचीन ग्रंथों में यत्र – तत्र कृष्ण का उल्लेख मिलता है जिससे उनके जीवन के विभिन्न रूपों का पता चलता है|
यदि वैदिक व संस्कृत साहित्य के आधार पर देखा जाए तो कृष्ण के तीन रूप सामने [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 17, 2008
निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख संत कवियों का परिचय
कबीर, कमाल, रैदास या रविदास, धर्मदास, गुरू नानक, दादूदयाल, सुंदरदास, रज्जब, मलूकदास, अक्षर अनन्य, जंभनाथ, सिंगा जी, हरिदास निरंजनी ।
कबीर
कबीर का जन्म 1397 ई. में माना जाता है. उनके जन्म और माता-पिता को लेकर बहुत विवाद है. लेकिन यह स्पष्ट है कि कबीर जुलाहा थे, क्योंकि उन्होंने अपने [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 17, 2008
रामभक्ति पंथी शाखा के प्रमुख कवि
रामानन्द, तुलसीदास, स्वामी अग्रदास, नाभादास, प्राणचंद चौहान, हृदयराम, केशवदास, सेनापति।
स्वामी रामानन्द
स्वामी रामानन्द का जन्म 1299ई. में माघकृष्णसप्तमी को प्रयाग में हुआ था। इनके पिता का नाम पुण्यसदनऔर माता का नाम सुशीला देवी था। इनका बाल्यकाल प्रयाग में बीता। यज्ञोपवीत संस्कार के उपरान्त वे प्रयाग से काशी चले आए और गंगा [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 17, 2008
निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवियों का परिचय
मलिक मुहम्मद जायसी, कुतबन, मंझन, उसमान, शेख नवी, कासिमशाह, नूर मुहम्मद, मुल्ला दाउद |
मलिक मुहम्मद जायसी
जायसी के जन्म और मृत्यु की कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध रहीं है. ये हिन्दी में सूफ़ी काव्य परंपरा के श्रेष्ठ कवि माने जाते हैं. ये अमेठी के निकट जायस के रहने वाले [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: September 17, 2008
कृष्णभक्ति शाखा के प्रमुख कवियों का परिचय
सूरदास, नंददास, कृष्णदास, परमानंद, कुंभनदास, चतुर्भुजदास, छीतस्वामी, गोविन्दस्वामी, हितहरिवंश, गदाधर भट्ट, मीराबाई, स्वामी हरिदास, सूरदास-मदनमोहन, श्रीभट्ट, व्यास जी, रसखान, ध्रुवदास, चैतन्य महाप्रभु ।
सूरदास
हिन्दी साहित्य के श्रेष्ठ कृष्णभक्त कवि सूरदास का जन्म 1483 ई. के आस-पास हुआ था. इनकी मृत्यु अनुमानत: 1563 ई. के आस-पास हुई. इनके बारे में [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: November 2, 2007
कबीर:गुरु भक्ति
जायसी
कबीर : एक सांप्रदायिक विश्लेषण
जायसी के साधना के सांम्प्रदायिक प्रतीक
कबीर : एक सामाजिक विश्लेषण
जायसी की देन
कबीर और आधुनिक सांप्रदायिक स्थिति
जायसी का रहस्यवाद
कबीर का प्रभाव
जायसी प्रमुख रचनाओं का परिचय
कबीर :- एक आध्यात्मिक विश्लेषण
मलिक मुहम्मद जायसी
कबीर भक्ति की साधना
जायसी,सुफी मत और भारतीय वातावरण [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: October 30, 2007
मलिक मुहम्मद जायसी, मलिक वंश के थे। मिस्त्र में मलिक सेनापति और प्रधानमंत्री को कहते थे। खिलजी राज्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चचा को मारने के लिए बहुत से मलिकों को नियुक्त किया था। इस कारण यह नाम इस काल में काफी प्रचलित हो गया। इरान में मलिक जमींदार को कहते हैं। मलिक जी [...]
Posted by: संपादक- मिथिलेश वामनकर on: October 29, 2007
हिंदी साहित्य का भक्ति काल 1375 वि0 से 1700 वि0 तक माना जाता है। यह युग भक्तिकाल के नाम से प्रख्यात है। यह हिंदी साहित्य का श्रेष्ठ युग है। समस्त हिंदी साहित्य के श्रेष्ठ कवि और उत्तम रचनाएं इस युग में प्राप्त होती हैं।
दक्षिण में आलवार बंधु नाम से प्रख्यात भक्त हो गए। इनमें से [...]
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