हिन्दी साहित्य

रीतिकाल

इस युग को रीतिकाल इसलिए कहते हैं, क्योंकि इसमें काव्य-रीति पर अधिक विचार हुआ है। इस काल में कई कवि ऐसे हुए हैं जो आचार्य भी थे और जिन्होंने विविध काव्यांगों के लक्षण देने वाले ग्रंथ भी लिखे। इस युग में श्रृंगार की प्रधानता रही।

4 Responses to "रीतिकाल"

Barson se gulam rahen unhe aades par chalne ki adat hai unhe aades chahiyen na ki dular. unhen dande ki aawashyakta hai. isliye yah aawashyak hai ki kanun men dradta lai jayen

pl. send ” skandgupt” all over study

response is nice

with regard

Rahul upadhyay

nice material

rahul upadhyay

Bhart Sangh ki bhasha ke rup me vikas- Sambhidhan me hindi rajyabhasha, Samaprk Bhasha, Rashtra Bhasa aur Antrarasriya Bhasa ke rup me hindi.Hindi ki sahogi bhash aur Inka parasparik shabandh,Jharkahnd ki bhason aur Bole ka shanchipt prachya.Hindi bhasa ka pramanik aur tachniki vistar-Hindi bhaha ka audhinikaran,pradhukikaran aur mankikaran prayjan mulak hindi.

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