हिन्दी साहित्य

रीतिकाल

इस युग को रीतिकाल इसलिए कहते हैं, क्योंकि इसमें काव्य-रीति पर अधिक विचार हुआ है। इस काल में कई कवि ऐसे हुए हैं जो आचार्य भी थे और जिन्होंने विविध काव्यांगों के लक्षण देने वाले ग्रंथ भी लिखे। इस युग में श्रृंगार की प्रधानता रही।

13 Responses to "रीतिकाल"

Barson se gulam rahen unhe aades par chalne ki adat hai unhe aades chahiyen na ki dular. unhen dande ki aawashyakta hai. isliye yah aawashyak hai ki kanun men dradta lai jayen

pl. send ” skandgupt” all over study

response is nice

with regard

Rahul upadhyay

nice material

rahul upadhyay

Bhart Sangh ki bhasha ke rup me vikas- Sambhidhan me hindi rajyabhasha, Samaprk Bhasha, Rashtra Bhasa aur Antrarasriya Bhasa ke rup me hindi.Hindi ki sahogi bhash aur Inka parasparik shabandh,Jharkahnd ki bhason aur Bole ka shanchipt prachya.Hindi bhasa ka pramanik aur tachniki vistar-Hindi bhaha ka audhinikaran,pradhukikaran aur mankikaran prayjan mulak hindi.

hindi is great jo pure bharat varsh ko eksutrata me bandhe hai , hindi ko mera salam hai , Hindi yah hamare desh ki ek mahatvapurna bhasha hai isliye uska har kisiko abhiman hona jaruri hai .

abe dikh kya raha he jise padh kar comment kare?

& its boooooooooooing!

u r right dude! its boooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooring!:/

please do send me two kavitva based on environment written by ritikal poet’s like dev etc. and with there meanings too.
thankyou :)

Thoda aur detail me rhta to achchA THA.

हिंदी साहित्य का इतिहास पूरा नहीं है ! कृपा कर यह सामग्री उपलब्ध करा दीजिये ! आपका वेब पत्र सराहनिए है ! धन्यवाद !

YE BAHUTH INFORMATIVE HA . AS A HINDI STUDENT. I APPRECIATE THIS…………

hindi sahiyta ka itihas me ritikal pramukh mana jata hain q ki sahitya ka rachana ritibadda rup se vikashit hua hain………..

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

प्रत्याख्यान

यह एक अव्यवसायिक वेबपत्र है जिसका उद्देश्य केवल सिविल सेवा तथा राज्य लोकसेवा की परीक्षाओं मे हिन्दी साहित्य का विकल्प लेने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है। यदि इस वेबपत्र में प्रकाशित किसी भी सामग्री से आपत्ति हो तो इस ई-मेल पते पर सम्पर्क करें-

mitwa1980@gmail.com

आपत्तिजनक सामग्री को वेबपत्र से हटा दिया जायेगा। इस वेबपत्र की किसी भी सामग्री का प्रयोग केवल अव्यवसायिक रूप से किया जा सकता है।

संपादक- मिथिलेश वामनकर

वेबपत्र को देख चुके है

  • 788,491 लोग

आपकी राय

Dr Vinod Singh Sacha… on जगनिक का आल्हाखण्ड
Anil Ahirwar on जगनिक का आल्हाखण्ड

कैलेण्डर

नवम्बर 2014
सो मँ बु गु शु
« अग    
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30  

वेब पत्र का उद्देश्य-

मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ, बिहार, झारखण्ड तथा उत्तरांचल की पी.एस.सी परीक्षा तथा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के हिन्दी सहित्य के परीक्षार्थियो के लिये सहायक सामग्री उपलब्ध कराना।

यह वेब पत्र सिविल सेवा परीक्षा मे हिन्दी साहित्य विषय लेने वाले परीक्षार्थियो की सहायता का एक प्रयास है। इस वेब पत्र का उद्देश्य किसी भी प्रकार का व्यवसायिक लाभ कमाना नही है। इसमे विभिन्न लेखो का संकलन किया गया है। आप हिन्दी साहित्य से संबंधित उपयोगी सामगी या आलेख यूनिकोड लिपि या कॄतिदेव लिपि में भेज सकते है। हमारा पता है-

mitwa1980@gmail.com

- संपादक

भारत के सर्वश्रेष्ट ब्लॊग

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 71 other followers

%d bloggers like this: