हिन्दी, भाषाई विविधता का एक ऐसा स्वरूप जिसने वर्तमान में अपनी व्यापकता में कितनी ही बोलियों और भाषाओं को सँजोया है। जिस तरह हमारी सभ्यता ने हजारों सावन और हजारों पतझड़ देखें हैं, ठीक उसी तरह हिन्दी भी उस शिशु के समान है, जिसने अपनी माता के गर्भ में ही हर तरह के मौसम देखने शुरू कर दिए थे। हिन्दी की यह माता थी संस्कृत भाषा, जिसके अति क्लिष्ट स्परूप और अरबी, फारसी जैसी विदेशी और पाली, प्राकृत जैसी देशी भाषाओं के मिश्रण ने हिन्दी को अस्तित्व प्रदान किया। जिस शिशु को इतनी सारी भाषाएँ अपने प्रेम से सींचे उसके गठन की मजबूती का अंदाज लगाना बहुत मुश्किल है।
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हिन्दी भाषा तथा देवनागरी लिपि |
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· हिन्दी भाषा की उत्पत्ति और विकास · अपभ्रंश:भाषा-प्रवाह तथा विशेषतायें · हिन्दी का भाषा वैभव तथा महत्व
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· देवनागरी लिपि का संक्षिप्त परिचय · अवधी · अवधी की विशेषता |
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bundeli
sir,
thanks for all hindi sahitya knowledge.
required me in detail of aadunik kal,
regards
jugal kishor
Mujhe Hindi Sahitya ki Kavya Shastra ki Jankari chahiya
jan kar ati prashannta hui ki Hindi Sahitya ke bare mai Internate par jankari uplabdha hai.
Thank you ……
March 12, 2009 at 7:25 pm
very good